बुधवार, 20 अक्तूबर 2010

बदलता बीहड़ और उसकी पंचायत

गंवई पंचायत की इस समर में बीहड़ के खबरी दौरे में मैंने बहुत सी नयी बातें जानी है, मसलन की यहा डकैत जब फरमान जारी करते थे तो उनका मकसद अपनी बिरादरी का उत्थान होता था और दुसरे का पतन। ऐसा ही विज्ञानं भी कहता है....... शायद यही बीहड़ की त्रासदी भी है. पूरे बीहड़ में इस बार मैंने गाओ की खाक छानी और चुनावी दौरे में डकैतों का फरमान तलाशा पर आजादी के बाद पहला ऐसा मौका इस बार के पंचायत चुनाव में आया की बीहड़ में विकास की बाते है और डकैतों का फरमान नदारद है! एक प्रत्याशी के पास गया उसने बड़े ही स्नेह के साथ मुझे बीडी ऑफर की उसके स्नेह में मै उसे मना नहीं कर सका, और जिंदगी में पहली बार बीडी का कश लिया... शायद ये उसका अपनापन था या वोटर को पटाने का तरीका पर बदलता बीहड़ देखकर ख़ुशी हुई की अब यहा के राश्ते डकैतों के संगीनों तले नही गुम होने वाले है......आप भी बीहड़ो का रुख करिए भले ही बीडी का कश न ले फिर भी इनकी कशिश ऐसी है की आप दुबारा आने से मना नहीं कर पाएंगे....
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